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History Of Babri Masjid | बाबरी मस्जिद का इतिहास

बाबरी मस्जिद का इतिहास भारत के सबसे जटिल और संवेदनशील मुद्दों में से एक है. सदियों पुराने इस विवाद की जड़ें अयोध्या में हैं, जिसे हिंदू धर्म में भगवान राम का जन्मस्थान माना जाता है.

बाबरी मस्जिद का इतिहास भारत के सबसे जटिल और संवेदनशील मुद्दों में से एक है. सदियों पुराने इस विवाद की जड़ें अयोध्या में हैं, जिसे हिंदू धर्म में भगवान राम का जन्मस्थान माना जाता है.

आइए, सरल हिंदी में Babri मस्जिद के इतिहास की झलकियां देखें:

प्रारंभिक इतिहास:

  • 1527 में, मुगल सम्राट बाबर के शासन के दौरान, अयोध्या में एक मस्जिद का निर्माण करवाया गया, जिसे Babri मस्जिद के नाम से जाना गया.
  • कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इस मस्जिद के निर्माण के लिए राम जन्मभूमि माने जाने वाले किसी मंदिर को ध्वस्त किया गया था, जबकि अन्य इस दावे पर सवाल उठाते हैं.
  • मस्जिद के निर्माण के बाद, अयोध्या में सदियों तक हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व बना रहा.

विवाद की शुरुआत:

  • 19वीं सदी के अंत में, हिंदू राष्ट्रवादी नेताओं ने दावा किया कि Babri मस्जिद राम जन्मभूमि पर बनाई गई थी और इसे मंदिर में बदलने की मांग की.
  • 1885 में, एक हिंदू संत ने मस्जिद के एक किनारे पर एक छोटा राम मंदिर बनवाया. धीरे-धीरे, Babri मस्जिद और राम जन्मभूमि को लेकर विवाद तेज होता गया.

आंदोलन और विध्वंस:

  • 1980 के दशक में, विश्व हिंदू परिषद (VHP) और शिवसेना जैसे हिंदू राष्ट्रवादी संगठनों ने राम मंदिर निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया.
  • 6 दिसंबर, 1992 को, हजारों कारसेवकों ने Babri मस्जिद पर हमला किया और उसे ध्वस्त कर दिया. इस घटना ने पूरे भारत में सांप्रदायिक दंगे भड़का दिए, जिसमें सैकड़ों लोगों की जान चली गई.

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद का समाधान:

  • Babri मस्जिद के विध्वंस के बाद, विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.
  • नवंबर 2019 में, कोर्ट ने फैसला सुनाया कि विवादित जमीन हिंदू महासभा को राम मंदिर निर्माण के लिए दी जाएगी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में ये भी मन के बाबरी मस्जिद किसी मंदिर को ध्वस्त कर के नहीं बनाया गया, क्यूंकी इसका कोई भी ठोस सुबूत नहीं मिल है , और मुसलमानों को अयोध्या में ही कहीं और पांच एकड़ जमीन देकर मस्जिद बनाने की अनुमति दी जाएगी.
  • इस फैसले के बाद, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का काम शुरू हो गया है. वहीं, मुसलमानों के लिए मस्जिद निर्माण के लिए जमीन आवंटित कर दी गई है.

Babri मस्जिद का इतिहास हमें क्या सिखाता है?

Babri मस्जिद का इतिहास सांप्रदायिक सद्भावना के महत्व और धार्मिक विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की आवश्यकता को रेखांकित करता है. हमें यह याद रखना चाहिए कि विभिन्न धर्मों और संस्कृतियों का सम्मान करना एक लोकतांत्रिक समाज के लिए जरूरी है.

ध्यान दें:

  • यह जानकारी विभिन्न स्रोतों से एकत्र की गई है और इस विषय पर विभिन्न दृष्टिकोण मौजूद हैं. इस विषय पर चर्चा करते समय संवेदनशीलता और सम्मान बनाए रखना महत्वपूर्ण है.

मुझे उम्मीद है कि यह जानकारी Babri मस्जिद के इतिहास को समझने में आपकी मदद करेगी.

कृपया ध्यान दें कि यह एक जटिल मुद्दा है और इस संक्षिप्त सारांश में सभी पहलुओं को शामिल करना संभव नहीं है. यदि आप और जानना चाहते हैं, तो मैं आपको सुझाव दे सकता हूं कि आप इस विषय पर लिखी गई पुस्तकों या लेखों को पढ़ें.

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